73 साल तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर कोई कानून ही नहीं था।
1950–1989 तक प्रधानमंत्री सीधे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करते थे। 21 आयुक्त इसी प्रक्रिया से बने।
2023 तक चयन प्रक्रिया पर कभी कोई कानूनी ढांचा था ही नहीं।
जब सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता का सुझाव दिया, तो मोदी सरकार ने तुरंत कानून बनाकर प्रक्रिया को औपचारिक, पारदर्शी और मजबूत किया।
*राहुल गांधी, अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के चक्कर में शायद इन तथ्यों को भूल बैठे हैं…*



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73 साल तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर कोई कानून ही नहीं था।
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