भारत ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए पेश किया दावा: खेल मंत्रालय सूत्र

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भारत ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए पेश किया दावा: खेल मंत्रालय सूत्र

भारत सरकार ने साल 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए अहमदाबाद सरकार के साथ मेजबानी का दावा पेश किया है। भारत ने इससे पहले साल 2010 में नई दिल्ली में 19वें राष्ट्रमंडल खेल 2030! नई दिल्ली: वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत ने 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन अहमदाबाद में करने के लिए औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश की है। खेल मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने बृहस्पतिवार को पीटीआई को यह जानकारी दी। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि इस पर कई सप्ताह से विचार चल रहा था। खेलों की मेजबानी में दिलचस्पी दिखाने से संबंधित दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च थी और भारत का पत्र भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा कुछ दिन पहले भेजा गया था।

सूत्र ने कहा, ‘हां, यह सच है, भारत की बोली आईओए और गुजरात राज्य द्वारा प्रस्तुत की गई है।’ अहमदाबाद शहर को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के लिए चुना गया है और अगर 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी भारत सफल रहता है तो यह इनकी मेजबानी के लिए भी सबसे आगे है। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) ने खुद को ‘कॉमनवेल्थ स्पोर्ट’ के रूप में ब्रांड किया है जो अब मूल्यांकन प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा और मेजबान की अंतिम नियुक्ति सीजीएफ महासभा द्वारा तय की जाएगी।

बोली प्रस्तुत करने का निर्णय खेल मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा हाल में इस बात पर जोर दिए जाने के बाद आया है कि देश खेलों की मेजबानी में रुचि रखता है। भारत ने अंतिम बार 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी और देश का लक्ष्य 2036 ओलंपिक की मेजबानी करने का भी है। देश ने उन सभी स्पर्धाओं की मेजबानी करने की इच्छा भी व्यक्त की थी जिन्हें 2026 राष्ट्रमंडल खेलों से हटा दिया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्लास्गो में आयोजन होने पर इसकी पदक तालिका प्रभावित नहीं हो।

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भोपाल। भोपाल मेट्रो परियोजना अब जमीन के ऊपर ही नहीं, बल्कि जमीन के नीचे इतिहास रचने जा रही है। ऑरेंज लाइन के अंडरग्राउंड सेक्शन के लिए देश की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) भोपाल पहुंच चुकी हैं । मध्य प्रदेश में पहली बार 3.39 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड मेट्रो टनल बनाई जाएगी, जो पुल पातारा से लेकर बड़ा बाग सिंधी कालोनी तक फैलेगी। इस ट्विन टनल के जरिए मेट्रो भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। करीब 65 फीट गहराई में बनने वाली यह टनल शहर के ट्रैफिक और विरासत को बिना प्रभावित किए आधुनिक परिवहन की नई राह खोलेगी । मार्च 2026 से टीबीएम मशीनों से खोदाई का काम शुरू होगा। अंडर ग्राउंड कॉरिडोर तैयार होने से करोंद की तरफ आ रही मेट्रो लाइन जुड़ेगी। आरेंज लाइन के अंडरग्राउंड कॉरिडोर को बनाने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने टीबीएम मशीन को बेंगलुरू से खरीदा है। एक मशीन की गोलाई 5.8 मीटर है। एक मशीन एक दिन में औसत 15 मीटर तक खोदाई करेगी।

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भोपाल। भोपाल मेट्रो परियोजना अब जमीन के ऊपर ही नहीं, बल्कि जमीन के नीचे इतिहास रचने जा रही है। ऑरेंज लाइन के अंडरग्राउंड सेक्शन के लिए देश की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) भोपाल पहुंच चुकी हैं । मध्य प्रदेश में पहली बार 3.39 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड मेट्रो टनल बनाई जाएगी, जो पुल पातारा से लेकर बड़ा बाग सिंधी कालोनी तक फैलेगी। इस ट्विन टनल के जरिए मेट्रो भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। करीब 65 फीट गहराई में बनने वाली यह टनल शहर के ट्रैफिक और विरासत को बिना प्रभावित किए आधुनिक परिवहन की नई राह खोलेगी । मार्च 2026 से टीबीएम मशीनों से खोदाई का काम शुरू होगा। अंडर ग्राउंड कॉरिडोर तैयार होने से करोंद की तरफ आ रही मेट्रो लाइन जुड़ेगी। आरेंज लाइन के अंडरग्राउंड कॉरिडोर को बनाने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने टीबीएम मशीन को बेंगलुरू से खरीदा है। एक मशीन की गोलाई 5.8 मीटर है। एक मशीन एक दिन में औसत 15 मीटर तक खोदाई करेगी।