जो बस्तर-सुकमा क्षेत्र कभी लाल आतंक (नक्सलवाद) का गढ़ था, जहाँ लोग भय के कारण घरों से नहीं निकलते थे, आज वहाँ की डोंडरा पंचायत में भयमुक्त होकर फोन चलाते बच्चों को देख मन आनंदित है।
विकास और विश्वास को दर्शाती यह तस्वीर आपसे साझा कर रहा हूँ।
जो बस्तर आज से एक दशक पहले नक्सली हिंसा, बम, बारूद और बंदूक के लिए जाना जाता था, वह मोदी सरकार में कला, संस्कृति और खेलों का हब बन रहा है। आज दंतेवाड़ा में ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम के माध्यम से बस्तरवासियों से संवाद कर अत्यंत खुशी हुई।
इस आयोजन से न केवल देशभर में बस्तर से शांति और विकास का संदेश जा रहा है, बल्कि कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी मिल रहा है।


